इस तथ्य से इनकार नहीं किया जा सकता कि महीने का यह समय कष्टदायक होता है - ऐंठन (cramps), पीड़ा, पेट फूलना (bloating) और दर्द से उत्पन्न कई अन्य लक्षण एक साथ सामने आते हैं। प्रत्येक महिला का मासिक धर्म का अनुभव भिन्न होता है। तथापि, मासिक धर्म की पीड़ा को कम करने के लिए योग का अभ्यास करना विश्व भर के विशेषज्ञों द्वारा अनुशंसित एक प्रभावी उपाय है।
शारीरिक गतिविधि या गतिशीलता के अभाव में शरीर विश्राम की स्थिति में रहता है, जिससे रक्त प्रवाह में कमी और मांसपेशियों में जकड़न आ जाती है, जो तीव्र पीड़ा का कारण बनती है। परिणामस्वरुप, यह आपके मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है। यहीं 'योग' एक प्राकृतिक समाधान के रूप में उभरता है, जो मासिक धर्म के दर्द और ऐंठन से राहत दिलाता है।
मासिक धर्म के दौरान योगाभ्यास: क्या करें और क्या न करें?
मासिक धर्म के दौरान योग करना एक व्यक्तिगत अनुभव है जो आपको अपने शरीर से गहराई से जुड़ने में सहायता करता है। इसीलिए, अपने शरीर की बात सुनना और केवल उसी प्रकार अभ्यास करना महत्वपूर्ण है जो आपके लिए स्वाभाविक और सहज हो। इस दौरान, आपकी इच्छा तीव्र 'हॉट योग' की हो सकती है या आप केवल 'सुखासन' में बैठना चाह सकती हैं। ये दोनों ही विकल्प पूर्णतः उचित हैं।
मासिक धर्म के दिन भी आपके अभ्यास को प्रभावित कर सकते हैं। तीसरे या चौथे दिन तक, जब ऐंठन और दर्द कम हो जाता है, तब आप अपनी क्षमता अनुसार अभ्यास बढ़ा सकती हैं।
योग मासिक धर्म की पीड़ा को कैसे कम करता है?
- विशिष्ट आसन: योग के विशेष आसन जैसे बालासन, बद्ध कोणासन और जानु शीर्षासन पेट के निचले हिस्से और पेल्विक मांसपेशियों को कोमलता से स्ट्रेच कर उन्हें आराम देते हैं।
- रक्त संचार: ये मुद्राएं रक्त परिसंचरण में सुधार करती हैं और मांसपेशियों के तनाव को कम करती हैं।
- तनाव मुक्ति: अभ्यास के दौरान गहरी श्वास लेने की तकनीक तंत्रिका तंत्र (nervous system) को शांत करती है, जिससे तनाव के कारण होने वाली ऐंठन कम होती है।
- सजगता (Mindfulness): योग का आध्यात्मिक पक्ष आपका ध्यान दर्द से हटाकर शरीर के साथ एक गहरा संबंध स्थापित करने और विश्राम को बढ़ावा देने में मदद करता है।
मासिक धर्म की पीड़ा कम करने के लिए 6 सरल योगासन
ये 6 सरल और प्रभावी योगासन पुनर्जीवित करने वाले घरेलू अभ्यास हैं, जो समय के साथ हार्मोनल संतुलन को बढ़ावा देते हैं और भविष्य के चक्रों में संभावित रूप से दर्द को कम करते हैं।
1. बद्ध कोणासन (Butterfly Pose)
- अपने घुटनों को बाहर की ओर मोड़ते हुए बैठें और पैरों के तलवों को एक साथ मिलाएँ।
- गहरे खिंचाव के लिए पैरों को शरीर के समीप लाएँ या हल्के खिंचाव के लिए उन्हें शरीर से दूर रखें।
- अधिक लाभ के लिए, आगे की ओर झुकने का प्रयास करें।
2. जानु शीर्षासन (Head To Knee Pose)
दाहिने पैर को सीधा फैलाएं और बाएं पैर के तलवे को दाहिनी जांघ के अंदरूनी हिस्से पर रखें। इसके बाद अपने धड़ को दाहिने पैर की ओर झुकाते हुए आगे झुकें। यही प्रक्रिया दूसरे पैर के साथ दोहराएं। यह आसन 'हैमस्ट्रिंग' की मांसपेशियों को स्ट्रेच करता है और कूल्हों को खोलता है।
3. अपानासन (Knees To Chest Pose)
पीठ के बल लेट जाएं और दोनों घुटनों को अपनी छाती की ओर लाएं। अपने हाथों से पैरों को पकड़ें और धीरे-धीरे अगल-बगल या गोलाकार घुमाएं ताकि निचली कमर की मालिश हो सके। इसे 'पवनमुक्तासन' भी कहा जाता है, जो पेट फूलने, ऐंठन और पाचन में सहायता करता है।
4. बालासन (Child’s Pose)
योग मैट पर घुटनों के बल बैठें और धीरे से अपनी एड़ियों पर बैठ जाएं। सुविधा के लिए आप घुटनों को आपस में सटाकर रख सकते हैं या उन्हें फैलाकर अपना पेट जांघों के बीच रख सकते हैं। सहारे के लिए आप तकिये या मुड़े हुए कंबल का उपयोग कर सकते हैं। यह आसन कमर के निचले हिस्से और जांघों को आराम देता है।
5. सुप्त बद्ध कोणासन (Goddess Pose)
यह बद्ध कोणासन का अधिक आरामदायक रूप है। इसमें आप पीठ के बल लेटकर पैरों के तलवों को आपस में मिलाते हैं। अपनी भुजाओं को बाहर की ओर फैलाएं और गहरी सांसें लें। यह पीठ के निचले हिस्से के दर्द और ऐंठन से राहत दिलाने में सहायक है।
6. पश्चिमोत्तानासन (Seated Forward Bend Pose)
अपने पैरों को सामने सीधा फैलाकर बैठें और आगे की ओर झुकें। झुकने से पहले अपनी रीढ़ को सीधा करें। यह आसन हैमस्ट्रिंग और पीठ को गहरा खिंचाव प्रदान करता है, जिससे मासिक धर्म के दौरान आराम मिलता है।
निष्कर्ष
योग एक शक्तिशाली अभ्यास है जिसके स्वास्थ्य के लिए बहुआयामी लाभ हैं। इसे अपने दैनिक जीवन में सम्मिलित करें। कोमल अनुभव के लिए आवश्यकतानुसार कंबल या तकिये (bolsters) का उपयोग करें। अपने मासिक धर्म के दिनों को योग के साथ सरल और सहज बनाएं।

